भारत का एक ऐसा मंदिर जहां भगवान बुद्ध ने प्राप्त किया था ज्ञान, गुप्त काल में हुआ था निर्माण, जानें क्या है इतिहास

Update: 2026-01-04 02:30 GMT

नई दिल्ली। बिहार के बोधगया में स्थित महाबोधि मंदिर (Mahabodhi Temple) बौद्ध धर्म के सबसे पवित्र स्थलों में से एक है। यह वही स्थान है जहां लगभग 2,500 साल पहले भगवान बुद्ध ने एक पीपल के पेड़ (बोधि वृक्ष) के नीचे ज्ञान (Enlightenment) प्राप्त किया था। बोधगया का महाबोधि मंदिर मूल रूप से सम्राट अशोक (तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व) के काल में बना था, लेकिन जो वर्तमान भव्य मंदिर दिखता है, वह गुप्त काल (5वीं-6वीं शताब्दी ईस्वी) में पूरी तरह ईंटों से निर्मित किया गया था और यह भारत के सबसे पुराने ईंट संरचनाओं में से एक है, जो आज भी मौजूद है।

ऐतिहासिक महत्व

 इस स्थल पर पहला मंदिर तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व में सम्राट अशोक द्वारा बनवाया गया था। वर्तमान मुख्य मंदिर संरचना 5वीं या 6वीं शताब्दी (गुप्त काल) की मानी जाती है। यह मंदिर पूरी तरह ईंटों से बना है और गुप्तकालीन भारतीय वास्तुकला का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जो बाद के बौद्ध मंदिरों के लिए प्रेरणा बना।

वास्तुकला

 यह ईंटों से बना भारत का सबसे पुराना और सबसे भव्य बौद्ध मंदिर है। मंदिर का मुख्य शिखर लगभग 55 मीटर (180 फीट) ऊँचा है और इसके चारों कोनों पर छोटे शिखर बने हुए हैं।

बोधि वृक्ष

मंदिर के पीछे पवित्र बोधि वृक्ष स्थित है, जिसे उसी मूल वृक्ष का वंशज माना जाता है जिसके नीचे बुद्ध ध्यान लगाते थे।

यूनेस्को विश्व धरोहर

 2002 में, यूनेस्को ने इसे विश्व धरोहर स्थल (World Heritage Site) घोषित किया था।

वज्रासन (हीरा सिंहासन)

 मंदिर के भीतर वह पत्थर का चबूतरा (वज्रासन) आज भी सुरक्षित है, जो बुद्ध के बैठने के स्थान को दर्शाता है।

पर्यटन और उत्सव (2026)

समय: मंदिर प्रतिदिन सुबह 5:00 बजे से रात 9:00 बजे तक खुला रहता है।

नया अपडेट: दिसंबर 2025 के अंत में, महाबोधि महाविहार का वार्षिक कैलेंडर 2026 जारी किया गया है, जो मंदिर की सांस्कृतिक विरासत को दर्शाता है।

बौद्ध महोत्सव 2026: जनवरी 2026 में होने वाले 'बौद्ध महोत्सव' की तैयारियाँ ज़ोरों पर हैं।

प्रबंधन: वर्तमान में इसे 'बोधगया मंदिर प्रबंधन समिति' (BTMC) द्वारा संचालित किया जाता है।

यात्रा के लिए उपयोगी जानकारी

प्रवेश: मंदिर में प्रवेश निःशुल्क है, लेकिन मोबाइल फोन और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण अंदर ले जाने की अनुमति नहीं है।

स्थान: यह गया जिले में स्थित है, जो पटना से लगभग 115 किमी और गया रेलवे स्टेशन से 16 किमी की दूरी पर है।ो 

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