नाबालिग के पायजामे का नाड़ा खींचना, बलात्कार की कोशिश ही है... सुप्रीम कोर्ट ने पलटा HC का फैसला, अदालत को लगाई फटकार

इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्रा ने मार्च 2025 में फैसला सुनाया था कि ऐसी हरकतें केवल 'बलात्कार की तैयारी' हो सकती हैं, 'कोशिश' नहीं।

Update: 2026-02-18 08:28 GMT

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने आज इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस विवादित फैसले को रद्द कर दिया है, जिसमें कहा गया था कि नाबालिग के निजी अंगों को छूना या उसके पायजामे का नाड़ा खींचना और उसे पुलिया के नीचे ले जाने की कोशिश 'बलात्कार की कोशिश' नहीं माना जा सकता। 

सुप्रीम कोर्ट का सख्त रूख

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इलाहाबाद हाई कोर्ट की टिप्पणियों को "संवेदनहीन" और "अमानवीय" करार दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि स्तनों को पकड़ना और पायजामे का नाड़ा खींचना भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत 'बलात्कार के प्रयास' की श्रेणी में आता है।

हाई कोर्ट का विवादित फैसला

इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्रा ने मार्च 2025 में फैसला सुनाया था कि ऐसी हरकतें केवल 'बलात्कार की तैयारी' हो सकती हैं, 'कोशिश' नहीं। उन्होंने आरोपियों पर लगी धारा 376 (रेप की कोशिश) को हटाकर कम गंभीर धाराओं में बदल दिया था।

अदालत को फटकार

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि न्यायिक अधिकारियों को यौन अपराधों से जुड़े मामलों में अधिक संवेदनशीलता और सहानुभूति दिखानी चाहिए। पीठ ने इस बात पर दुख जताया कि फैसला सुरक्षित रखने के चार महीने बाद भी ऐसी संवेदनहीन टिप्पणी की गई।

नई गाइडलाइंस के निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल ज्यूडिशियल एकेडमी (NJA) को एक विशेषज्ञ समिति बनाने का निर्देश दिया है। यह समिति यौन अपराधों और संवेदनशील पीड़ितों से जुड़े मामलों में जजों के लिए भाषा और व्यवहार संबंधी गाइडलाइंस तैयार करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि आरोपियों के खिलाफ बलात्कार के प्रयास और POCSO एक्ट के तहत मूल आरोपों के साथ ही मुकदमा चलाया जाए।

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