क्या है ईद पर सेवइयां खाने की परंपरा! जानें इसके पीछे धार्मिक और सांस्कृतिक कारण

Update: 2026-03-21 02:30 GMT

आज भारत में ईद का त्योहार मनाया जा रहा है। वहीं ईद पर सेवइयां खाने की परंपरा सदियों पुरानी है। हालांकि इसके पीछे कई खास धार्मिक और सांस्कृतिक कारण हैं। यहां तक कि सेवइयां इतनी मशहूर हैं कि इस दिन को कई जगहों पर 'सेवइयों वाली ईद' भी कहा जाता है।

'मीठी ईद' का महत्व

ईद-उल-फितर को 'मीठी ईद' भी कहा जाता है। रमजान के एक महीने के कठिन रोजों (व्रत) के बाद, अल्लाह का शुक्रिया अदा करने के लिए दिन की शुरुआत कुछ मीठा खाकर करने की सुन्नत (परंपरा) है। सेवइयां एक ऐसा व्यंजन है जिसे बड़े बर्तन में बनाया जाता है और मोहल्ले, दोस्तों व रिश्तेदारों में बांटा जाता है। यह मेल-जोल और आपसी प्रेम को दर्शाता है।

अरबी परंपरा (खुरमा)

'शीर खुरमा' में 'शीर' का अर्थ दूध और 'खुरमा' का अर्थ खजूर होता है। अरब देशों में खजूर मुख्य था, जिसे दूध के साथ खाया जाता था। भारत और आसपास के देशों में इसमें सेवइयों का तड़का लगा, जो अब इस त्योहार की पहचान बन गई है। दूध, ड्राई फ्रूट्स, केसर और चीनी से बनी गाढ़ी सेवइयां खुशहाली और बरकत का प्रतीक मानी जाती हैं।

Tags:    

Similar News